Somaiya Vidyavihar University’s AgriTech Hackathon shows how technology can learn directly from farmer

Publish Date

16th February 2026

Area of Interest

Agriculture, Technology

Type

Online

Source

Institution(s)

K J Somaiya School of Engineering

बदलते मौसम, घटते जल संसाधन और बिगड़ती मिट्टी की सेहत जैसी चुनौतियों के बीच भारतीय कृषि एक संक्रमण काल से गुजर रही है। ऐसे समय में Somaiya Vidyavihar University ने अपने एग्रीटेक हैकाथॉन 2025–26 के माध्यम से यह दिखाया कि तकनीकी शिक्षा को खेत और किसान से जोड़कर किस तरह व्यवहारिक समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

 यह राष्ट्रीय स्तर का दो-चरणीय आयोजन K J Somaiya School of Engineering के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग द्वारा, K J Somaiya Institute of Applied Agricultural Research (कर्नाटक) के सहयोग से आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य “किसान और विज्ञान” के बीच सार्थक सेतु बनाना था, ताकि छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी हकीकत को समझते हुए समाधान विकसित करें।

खेत से शुरू हुआ नवाचार

हैकाथॉन का पहला चरण कर्नाटक स्थित KIAAR परिसर में आयोजित हुआ। 40 से अधिक छात्र टीमों ने पारंपरिक प्रश्नोत्तरी पद्धति को छोड़कर सीधे खेतों का रुख किया। यहां उन्होंने 300 से अधिक किसानों से बातचीत की, कृषि वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों से चर्चा की तथा फसल सुरक्षा, सिंचाई सुधार, पोषक तत्व प्रबंधन, रोग नियंत्रण, उपज पूर्वानुमान और टिकाऊ खेती जैसे विषयों पर गहन अध्ययन किया। इस संवाद से 26 ठोस समस्या कथन तैयार हुए, जो किसानों की दैनिक चुनौतियों पर आधारित थे।

कार्यक्रम में P L Patil, कुलपति, University of Agricultural Sciences, Dharwad सहित विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और Godavari Biorefineries Limited के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस पहल को और सशक्त बनाया।

KIAAR के निदेशक डॉ. नंदकुमार कुंचगे ने कहा कि किसानों, शोधकर्ताओं और छात्रों की संयुक्त भागीदारी से विकसित समाधान अधिक उपयोगी और दीर्घकालिक प्रभाव वाले होंगे।

मुंबई में समाधान की दिशा

दूसरा चरण मुंबई स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हुआ, जहां छात्रों ने 24 घंटे के भीतर वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी समाधान विकसित किए। देशभर से आई टीमों ने सिंचाई प्रणाली, रोग पहचान तकनीक, सेंसर आधारित निगरानी, पोषक तत्व प्रबंधन और टिकाऊ खेती के लिए अभिनव मॉडल प्रस्तुत किए।

 

‘सीड मदर’ का संदेश

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि Rahibai Soma Popere थीं, जिन्हें ‘सीड मदर ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। पद्मश्री और नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित रहीबाई पोपेरे ने अपने अनुभव साझा करते हुए देशी बीज संरक्षण और मिट्टी की सेहत के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “माती वाचली तर शेती वाचेल, शेती वाचली तर पुढची पिढी वाचेल।” उनका संदेश था कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक है जब वह प्रकृति और सततता के सिद्धांतों के अनुरूप हो।